सफला एकादशी 2025: सफलता, शुभता और नई ऊर्जा का पवित्र दिन

क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि आप मेहनत बहुत करते हैं… लेकिन परिणाम वैसा नहीं मिलता जैसा होना चाहिए?  जैसे जीवन में सब कुछ बस थोड़ा सा अटक गया हो— राहें दिखती हों, लेकिन चलने का आत्मविश्वास जैसे कहीं खो गया हो? अगर हाँ, तो आपको जानकर हैरानी होगी कि हिंदू परंपरा में एक ऐसा दिन है जिसे भाग्य को सक्रिय करने वाला दिन कहा गया है। एक ऐसा व्रत जिसे सिर्फ अनुष्ठान नहीं, बल्कि मन और कर्म को फलदायी बनाने का आध्यात्मिक अवसर माना गया है।

और वही दिन है — सफला एकादशीहर साल पौष माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली सफला एकादशी को बहुत शुभ माना गया है। यह एकादशी केवल व्रत का दिन नहीं है, बल्कि जीवन में नई शुरुआत, मन की शांति और सफलता को आकर्षित करने का विशेष अवसर भी है।

सफला एकादशी 2025 इस वर्ष सोमवार, 15 दिसंबर को मनाई जाएगी। तिथि 14 दिसंबर की शाम से शुरू होकर 15 दिसंबर की रात तक चलेगी।

यह एक ऐसा दिन है जब मनुष्य अपने मन, कर्म और लक्ष्य को शुद्ध करता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करता है। यदि आप जीवन में सफलता, शांति और सकारात्मक परिवर्तन चाहते हैं—तो यह एकादशी आपके लिए बहुत उपयोगी है।

14 दिसंबर 2025, शाम 6:49 बजे

15 दिसंबर 2025, रात 9:19 बजे

15 दिसंबर 2025 (सोमवार)

16 दिसंबर 2025 सुबह 7:07 बजे से 9:11 बजे के बीच

पारण समय का पालन बहुत जरूरी है। यदि पारण सही समय पर न किया जाए, तो व्रत का फल कम हो जाता है।

सफला शब्द का अर्थ है—सफलता, सिद्धि और पूर्णता
इस दिन किए गए व्रत, पूजा और तप को साधारण दिनों की तुलना में कई गुना फलदायी माना जाता है।

✔ मनोकामनाएं पूरी होती हैं
✔ रुके हुए कार्य आगे बढ़ते हैं
✔ नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
✔ मन को शांति मिलती है
✔ आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है
✔ जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं

कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपने भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं और जीवन के कठिन रास्तों को आसान करते हैं।

स्वच्छता मन और शरीर दोनों को पवित्र बनाती है।

एक साफ चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

  • पीले फूल
  • पीले फल
  • कपूर, धूप, दीप
  • तुलसी पत्र
  • चंदन

इन सबके साथ शांत मन से पूजा करें।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
या
विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

  • अनाज, विशेषकर चावल का सेवन बिल्कुल न करें।
  • फलाहार या निर्जल व्रत, क्षमता अनुसार रखें।
  • क्रोध, नकारात्मकता, कटु शब्दों से दूर रहें।

अपने हृदय की सच्ची इच्छाओं को भगवान के सामने रखें।

16 दिसंबर को निर्धारित समय में व्रत खोलें। पहले पानी ग्रहण करें, फिर हल्का भोजन करें।

मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, कार्यों में गति मिलती है।

ध्यान और व्रत मन को शांत करता है।

दुविधा दूर होती है और निर्णय शक्ति बढ़ती है।

भक्त भगवान विष्णु के और निकट महसूस करते हैं।

व्रत व्यक्ति को भीतर से शुद्ध करता है।

गरीबों की मदद करें, इससे व्रत का फल बहुत बढ़ता है।

एक छोटी सी कहानी, जो आज के समय के हर युवक-युवती को प्रेरणा दे सकती है।

कहानी: “आत्मविश्वास की लौ”

रिया नाम की एक युवती थी। उसके जीवन में बहुत जिम्मेदारियाँ थीं—घर, पढ़ाई, नौकरी और अपने सपनों की जद्दोजहद। हर दिन वह मेहनत करती, लेकिन परिणाम उसकी चाहत के अनुसार नहीं आते। धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास कम होने लगा।

एक दिन उसकी मां ने कहा—“बेटी, इस बार सफला एकादशी का व्रत कर। भगवान से बात कर। अपने मन की उलझनें उन्हें सुना। शायद कोई नया रास्ता खुले।”

रिया ने पहली बार व्रत रखने का निर्णय लिया।
वह सुबह जल्दी उठी, स्नान किया, पूजा की और एक दीपक जलाया। उसने भगवान विष्णु के सामने बैठकर धीरे से कहा—

“मुझे बस इतनी शक्ति दे दो कि मैं अपने रास्ते पर विश्वास रख सकूं।”

पूरे दिन उसने शांत मन से व्रत किया।
न कोई दौड़, न कोई तनाव, बस अपने मन को सुनने की कोशिश।

अगले ही दिन, रिया के भीतर जैसे कुछ बदल गया।
उसे एक नई ऊर्जा महसूस हुई।
वह पहले से कहीं अधिक शांत, साहसी और स्पष्ट महसूस कर रही थी।

जब वह अपने काम पर लौटी, उसकी सोच बदली हुई थी। वही काम, वही जीवन—पर नजरिया नया था।

कुछ ही समय में उसके प्रयास रंग लाने लगे।
और धीरे-धीरे सफलता उसके कदम चूमने लगी।

रिया समझ गई कि कभी-कभी सफलता बाहर नहीं, अंदर से शुरू होती है
उस विश्वास से, जो हम खुद में जगाते हैं।

यही है सफला एकादशी का चमत्कार—
यह मन को नया प्रकाश देती है, और वही प्रकाश जीवन को सफल बनाता है।

  • अपना लक्ष्य लिखें
  • मन की नकारात्मकता दूर करें
  • किसी जरूरतमंद की मदद करें
  • पूरे दिन सकारात्मक ऊर्जा रखें
  • भगवान को धन्यवाद दें
  • खुद को माफ करें और नई शुरुआत करें

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