Table of Contents
“कर्पूर गौरम करुणावतारम्” भगवान शिव की सबसे लोकप्रिय, पवित्र और शक्तिशाली स्तुति/आरती में से एक है, जिसे भारत ही नहीं बल्कि विश्वभर के शिव भक्त बड़े प्रेम और भक्ति से गाते हैं। यह मंत्र शिव के निर्मल, शान्त, कल्याणकारी और करुणामयी स्वरूप का वर्णन करता है। यह स्तुति मंदाकिनी की तरह मन को शान्त करती है और साधक के जीवन में आध्यात्मिक प्रकाश लाती है।
कर्पूर गौरम करुणावतारं आरती pdf यह मंत्र आमतौर पर आरती, रुद्राभिषेक, अभिषेक पूजा, ध्यान, महाशिवरात्रि, सोमवारी पूजा तथा हर शिव मंदिर में संध्या आरती के समय नियमित रूप से गाया जाता है।
नीचे हम इस लेख में इसके शब्दार्थ, गूढ़ अर्थ, इतिहास, लाभ, वैज्ञानिक दृष्टि, और सही विधि का विस्तृत वर्णन कर रहे हैं—ताकि भक्त इससे अधिकतम आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सके।
कर्पूर गौरम करुणावतारम् – मूल मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं
संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे
भवं भवानीसहितं नमामि ॥
यह मंत्र भगवान शिव और माता पार्वती दोनों को समर्पित है।
कर्पूर गौरम करुणावतारं आरती pdf
मंत्र का सुंदर शब्दार्थ
- कर्पूरगौरम् – जो कपूर (कर्पूर) की तरह श्वेत, उज्ज्वल और पवित्र हो
- करुणावतारम् – जो करुणा का अवतार हो
- संसारसारम् – जो संसार का सार, सत्य और आधार हो
- भुजगेन्द्रहारम् – जिनके गले में सर्पों का हार सुशोभित हो
- सदा वसन्तं हृदयारविन्दे – जो सदैव भक्तों के हृदय रूपी कमल में निवास करते हैं
- भवं भवानी सहितम् नमामि – मैं माता पार्वती सहित भगवान शिव को प्रणाम करता हूँ

कर्पूर गौरम करुणावतारम् का इतिहास और स्रोत
हुत से विद्वानों के अनुसार यह स्तुति—
- शिव पुराण,
- रुद्रयामल तंत्र,
- और प्राचीन तनत्रिक उपासना ग्रंथों में मिलती है।
यह स्तुति नीलकरणी शिव भजन परंपरा का भी हिस्सा मानी जाती है, जिसे दक्षिण भारत से लेकर कश्मीर तक सभी शैव परंपराओं ने अंगीकार किया।
मंत्र जप की संख्या
- सामान्य: 11 बार
- साधना हेतु: 108 बार
कर्पूर गौरम करुणावतारम् केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा, शांति, और दिव्यता का स्रोत है। इस मंत्र का नियमित जप मनुष्य के जीवन में— शांति, मानसिक शक्ति, सकारात्मकता, और दिव्य आशीर्वाद