Laxmi dhyan mantra

ॐ पद्मासनस्थिते देवी परब्रह्मस्वरूपिणी।
परमेशि परमेशान्यै नमस्ते ब्रह्मचारिणि॥

या सा पद्मासनस्था विपुलकटीतटा हेमवर्णा प्रसन्ना।
त्रैलोक्यं व्याप्तमूर्तेरखिलमखिलं निर्विकारं प्रसन्नम्॥

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥


मंत्र:

ॐ पद्मासनस्थिते देवी परब्रह्मस्वरूपिणी।
परमेशि परमेशान्यै नमस्ते ब्रह्मचारिणि॥

अर्थ:

हे देवी लक्ष्मी! जो पद्मासन पर विराजमान हैं, जो परम ब्रह्म की स्वरूपिणी हैं, जो समस्त संसार की परमेश्वरी हैं—आपको मेरा प्रणाम है। आप पवित्र, शांत और दिव्य ऊर्जा से परिपूर्ण हैं।

मंत्र:

या सा पद्मासनस्था विपुलकटीतटा हेमवर्णा प्रसन्ना।
त्रैलोक्यं व्याप्तमूर्तेरखिलमखिलं निर्विकारं प्रसन्नम्॥

अर्थ:

वह देवी, जो कमल के आसन पर बैठी हैं, जिनकी कटीप्रदेश सुंदर और विशाल है, जिनका शरीर सोने के समान दमकता है और जिनका चेहरा प्रसन्न है—उनका स्वरूप तीनों लोकों में व्याप्त है। वह सब कुछ नियंत्रित करती हैं और निर्मल, निष्कलंक एवं शांत रूप से सबको कृपा देती हैं।


मंत्र:

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थ:

जो देवी सभी प्राणियों में लक्ष्मी स्वरूप में विद्यमान हैं—उन्हीं को बार-बार नमस्कार है। उनकी कृपा से समृद्धि, सौभाग्य, सुख और शांति प्राप्त होती है।

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