राहु केतु के लक्षण और उपाय(राहु केतु के उपाय) : Rahu Ketu ke Lakshan aur Upay (Rahu Ketu ke Upay)

क्या आपके जीवन में अचानक उथल-पुथल मच गई है?
कभी ऐसा लगता है कि दिमाग काम नहीं कर रहा (भ्रम), तो कभी ऐसा लगता है कि दुनिया से एकदम कट गए हैं (अकेलापन)?

अगर हाँ, तो यह किसी और की नहीं, बल्कि ज्योतिष के दो सबसे रहस्यमयी ग्रहों—राहु और केतु—की शरारत हो सकती है।

ये दोनों भौतिक ग्रह (Physical Planets) नहीं हैं, ये ‘छाया ग्रह’ (Shadow Planets) हैं। लेकिन इनका असर इतना ठोस होता है कि यह रंक को राजा और राजा को रंक बना सकते हैं। राहु और केतु हमेशा एक-दूसरे के आमने-सामने (180 डिग्री पर) रहते हैं। अगर एक आपको सपने दिखा रहा है, तो दूसरा आपको हकीकत का कड़वा घूंट पिला रहा है।

‘द मंदिर दर्शन’ के इस लेख में, हम बहुत ही सरल भाषा में समझेंगे कि आप कैसे पहचानें कि आपकी कुंडली में राहु खराब है या केतु, और इनके अचूक घरेलू उपाय क्या हैं।

राहु ‘सिर’ है। यह सोचता बहुत है, इसे ‘चाहिए’ (Desire) बहुत कुछ, लेकिन पेट न होने के कारण इसकी भूख कभी शांत नहीं होती। जब राहु खराब होता है, तो ये संकेत मिलते हैं:

  1. दिमाग में धुंध (Confusion): आप फैसला नहीं ले पाते। हर वक्त डर और वहम बना रहता है। ऐसा लगता है जैसे कोई जादू-टोना कर रहा है।
  2. अचानक घटनाएं: एक्सीडेंट, अचानक चोट लगना, या पुलिस केस होना।
  3. घर में गंदगी और खराबी: घर के टॉयलेट गंदे रहना, दीवारों में सीलन आना, या बिजली के उपकरण (Electronics) बार-बार खराब होना।
  4. नींद की समस्या: रात को डरावने सपने आना या बिल्कुल नींद न आना (Insomnia)।
  5. गलत आदतें: शराब, जुआ या किसी भी प्रकार का नशा करने की लत लग जाना।

केतु ‘धड़’ है (बिना सिर का)। इसके पास दिमाग नहीं है, सिर्फ दिल है। यह ‘मोक्ष’ और ‘अलगाव’ (Detachment) का कारक है। जब केतु खराब होता है, तो जीवन वीरान होने लगता है:

  1. अनजान बीमारी: शरीर में दर्द रहता है, लेकिन डॉक्टर को बीमारी पकड़ में नहीं आती (Undiagnosed illness)।
  2. अकेलापन: व्यक्ति खुद को परिवार और समाज से काट लेता है। डिप्रेशन जैसा महसूस होता है।
  3. नौकरी छूटना: केतु ‘स्थिरता’ (Stability) छीन लेता है। बार-बार नौकरी बदलना या व्यापार का ठप हो जाना।
  4. जोड़ों का दर्द: घुटनों में, कमर में या पैरों में लगातार दर्द रहना।
  5. संतान कष्ट: बेटे से अनबन होना या संतान प्राप्ति में बाधा आना।

राहु को शांत करने के लिए “स्वच्छता” और “नियम” सबसे बड़े हथियार हैं।

1. चांदी का प्रयोग
राहु को शांत करने के लिए चांदी (चंद्रमा का प्रतीक) बहुत कारगर है।

  • उपाय: अपनी जेब में चांदी का एक चौकोर टुकड़ा रखें या गले में चांदी की चेन पहनें।

2. सरस्वती पूजा
राहु ‘भ्रम’ है और सरस्वती ‘ज्ञान’ हैं। ज्ञान आते ही भ्रम भाग जाता है।

  • उपाय: रोज सुबह ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ का जाप करें या नीले फूल देवी को चढ़ाएं।

3. रसोई में भोजन

  • उपाय: जमीन पर बैठकर या रसोई (Kitchen) में बैठकर खाना खाने से राहु का बुरा असर कम होता है।

4. सफाईकर्मियों का सम्मान

  • उपाय: सफाई कर्मचारियों को कुछ पैसे, चाय या भोजन दें। उन्हें कभी अपशब्द न कहें।

5. जौ और कोयला

  • उपाय: अगर राहु बहुत परेशान कर रहा है, तो जौ (Barley) को दूध में धोकर बहते पानी में प्रवाहित करें।

केतु को ठीक करने के लिए “सेवा” और “आध्यात्म” की जरूरत होती है।

1. भगवान गणेश की पूजा
केतु के पास सिर नहीं है, और गणेश जी को हाथी का सिर लगा था। गणेश जी ही केतु को दिशा दे सकते हैं।

  • उपाय: रोज गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें या ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का जाप करें।

2. कुत्तों की सेवा
केतु का वाहन कुत्ता माना जाता है।

  • उपाय: रोज गली के कुत्तों को रोटी (बिना चीनी की) या बिस्किट खिलाएं। अगर कुत्ता काले और सफेद रंग (दो-रंगा) का हो तो और भी अच्छा है।

3. कानों में सोना

  • उपाय: केतु के बुरे प्रभाव को रोकने के लिए कानों में सोना पहनना (Ear piercing) एक पारंपरिक और अचूक उपाय है।

4. केसर का तिलक

  • उपाय: केतु बृहस्पति का शिष्य है। माथे पर रोज केसर या हल्दी का तिलक लगाने से केतु शुभ फल देने लगता है।

5. कंबल दान

  • उपाय: किसी मंदिर के बाहर बैठे गरीब को या किसी आश्रम में चितकबरा (काले-सफेद रंग का) कंबल दान करें।

चूंकि ये दोनों हमेशा साथ काम करते हैं, इसलिए कुछ उपाय ऐसे हैं जो दोनों को एक साथ शांत करते हैं:

1. भगवान शिव की आराधना (Lord Shiva)
भगवान शिव ने विष पिया था और गले में नाग (राहु-केतु का रूप) धारण किया है।

  • विधि: सोमवार को शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाएं। ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप करें। यह राहु-केतु के हर दोष को भस्म कर देता है।

2. शिव परिवार की पूजा

  • शिव जी, मां पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय—पूरे शिव परिवार की पूजा करने से घर का कलह (राहु) और बीमारी (केतु) दोनों दूर होते हैं।

3. कुल देवता/देवी की पूजा

  • अपने पूर्वजों और कुल देवता को कभी न भूलें। अमावस्या के दिन उनके नाम का दीपक जलाएं।

राहु और केतु हमें डराने के लिए नहीं, बल्कि हमें सुधारने के लिए आते हैं।
राहु सिखाता है कि “साफ-सफाई रखो और भ्रम में मत जिओ।”
केतु सिखाता है कि “सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दो और सेवा करो।”

अगर आप अपनी दिनचर्या में थोड़ा बदलाव लाएंगे, टॉयलेट साफ रखेंगे, कुत्तों को खाना खिलाएंगे और महादेव का नाम लेंगे, तो ये छाया ग्रह आपका बाल भी बांका नहीं कर पाएंगे।

हर हर महादेव!

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