मासिक शिवरात्रि: हर महीने शिव कृपा पाने का रहस्य Masik Shivratri ka mahatva


हम सभी साल में एक बार आने वाली ‘महाशिवरात्रि’ (Mahashivratri) का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। उस दिन मंदिरों में पैर रखने की जगह नहीं होती, हर कोई एक लोटा जल चढ़ाने के लिए घंटों लाइन में लगता है।

लेकिन, जरा सोचिए… अगर आपको महादेव को प्रसन्न करने का मौका साल में सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि हर महीने मिले तो?

जी हाँ, हमारे शास्त्रों में भगवान शिव की आराधना के लिए हर महीने एक विशेष तिथि निर्धारित की गई है, जिसे ‘मासिक शिवरात्रि’ (Masik Shivratri) कहते हैं।

शिव पुराण के अनुसार, यह वह रात है जब “शून्य” और “अनंत” का मिलन होता है। यह वह रात है जब चंचल मन (चंद्रमा) स्थिर होकर शिव (चेतना) में विलीन हो जाता है। जो भक्त महाशिवरात्रि पर व्रत नहीं रख पाते या जिनकी कोई विशेष मनोकामना (जैसे विवाह या संकट मुक्ति) है, उनके लिए मासिक शिवरात्रि का व्रत किसी वरदान से कम नहीं है।

‘द मंदिर दर्शन’ के इस विस्तृत लेख में, हम आपको बताएंगे कि मासिक शिवरात्रि महाशिवरात्रि से कैसे अलग है, इसे कब और कैसे मनाना चाहिए, और इस दिन शिवलिंग पर क्या चढ़ाने से आपकी कौन सी इच्छा पूरी होगी।

हिन्दू पंचांग में हर महीने दो पक्ष होते हैं—शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।
हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (14वें दिन) को ‘मासिक शिवरात्रि’ मनाई जाती है। यह अमावस्या से ठीक एक दिन पहले की रात होती है।

अध्यात्म और विज्ञान का कनेक्शन:
अमावस्या की ओर बढ़ते हुए चंद्रमा की शक्ति क्षीण (कम) हो जाती है। चंद्रमा हमारे ‘मन’ का कारक है। जब चंद्रमा कमजोर होता है, तो हमारा मन बेचैन, उदास और कमजोर होने लगता है।
भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया है। इसलिए, जब हम मासिक शिवरात्रि (चतुर्दशी) की रात को शिव जी की पूजा करते हैं, तो वे हमारे कमजोर मन को संभाल लेते हैं। वे हमें मानसिक शांति और आत्मबल देते हैं।

क्या है मासिक शिवरात्रि? 

अक्सर भक्त कंफ्यूज हो जाते हैं। आइए इसे स्पष्ट करें:

  1. महाशिवरात्रि (Mahashivratri): यह साल में केवल एक बार आती है (फाल्गुन मास में)। यह शिव और शक्ति (पार्वती) के विवाह की रात है और इसी दिन शिवलिंग का प्रादुर्भाव हुआ था।
  2. मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri): यह साल के 12 महीनों में हर महीने आती है। यह महाशिवरात्रि के व्रत को निरंतर (Continue) रखने का तरीका है। जिन लोगों ने महाशिवरात्रि का व्रत शुरू किया है, उन्हें इसका उद्यापन करने के लिए साल भर मासिक शिवरात्रि का व्रत करना चाहिए।

शिव पुराण में इस व्रत की महिमा का विस्तार से वर्णन है:

  1. विवाह बाधा निवारण: जिन कन्याओं के विवाह में देरी हो रही है या जिन्हें मनचाहा वर चाहिए, उनके लिए यह व्रत सबसे शक्तिशाली माना गया है। कहते हैं माता पार्वती ने भी शिव जी को पाने के लिए कठिन तप किया था।
  2. इंद्रियों पर नियंत्रण: यह व्रत इंसान को काम, क्रोध, लोभ और मोह पर काबू पाना सिखाता है।
  3. असंभव कार्य संभव: भोलेनाथ को ‘औढर दानी’ कहा जाता है। अगर आप हर महीने नियम से मासिक शिवरात्रि का अभिषेक करते हैं, तो वे असंभव को भी संभव कर देते हैं।
  4. मोक्ष की प्राप्ति: जो भक्त साल भर बिना नागा किए मासिक शिवरात्रि का व्रत रखते हैं, उन्हें अंत समय में शिवलोक की प्राप्ति होती है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच विवाद हो गया कि “हम दोनों में श्रेष्ठ कौन है?”

विवाद इतना बढ़ गया कि युद्ध की स्थिति बन गई। तभी अचानक, उनके बीच एक विशाल, आदि-अंतहीन अग्नि स्तंभ (Pillar of Fire) प्रकट हुआ। यह स्तंभ पृथ्वी से लेकर आकाश तक फैला हुआ था और इसकी कोई सीमा नजर नहीं आ रही थी।

ब्रह्मा जी हंस बनकर उसके ऊपरी सिरे को खोजने उड़े और विष्णु जी वराह (सूअर) बनकर उसकी जड़ खोजने पाताल में गए। हजारों साल खोजने के बाद भी उन्हें न अंत मिला न आरंभ।

वे दोनों हार मानकर वापस आए। तभी उस अग्नि स्तंभ से भगवान शिव अपने साकार रूप में प्रकट हुए। वह दिन (तिथि) फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी थी (महाशिवरात्रि)।

भगवान शिव ने कहा: “चूंकि मैं आज के दिन अग्नि लिंग के रूप में प्रकट हुआ हूँ, इसलिए यह तिथि मुझे अत्यंत प्रिय होगी। जो भक्त हर महीने की इस तिथि (कृष्ण चतुर्दशी) को मेरी पूजा करेगा, वह मुझे हमेशा प्रिय रहेगा।”

तभी से हर महीने की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई।

मासिक शिवरात्रि की पूजा का फल तभी मिलता है जब वह सही समय पर की जाए।
शिव पूजा के लिए प्रदोष काल (शाम का समय) और निशिता काल (मध्यरात्रि/Midnight) सबसे उत्तम माने गए हैं।

  • निशिता काल: रात के लगभग 11:45 PM से 12:45 AM के बीच का समय (स्थान के अनुसार बदल सकता है)। यह वह समय है जब ब्रह्मांड की ऊर्जा अपने चरम पर होती है। इस समय किया गया 1 मंत्र का जाप भी 1000 गुना फल देता है।

अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो इन नियमों का पालन करें:

सुबह की तैयारी:

  1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  2. घर के मंदिर में दीपक जलाएं और संकल्प लें: “हे महादेव! मैं (अपना नाम) आज मासिक शिवरात्रि का व्रत पूरी श्रद्धा से रखूँगा/रखूँगी। मुझे शक्ति दें।”
  3. दिन भर फलाहार (फल, दूध) पर रहें। अन्न (Grain) और नमक (Salt) का त्याग करें।

शाम/रात की पूजा (मुख्य पूजा):

  1. शाम को दोबारा स्नान करें या हाथ-मुंह धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. शिवलिंग को एक बड़ी थाली में रखें।
  3. जलाभिषेक: सबसे पहले “ॐ नमः शिवाय” बोलते हुए गंगाजल या शुद्ध जल चढ़ाएं।
  4. पंचामृत अभिषेक: अब दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पांचों को मिलाकर या अलग-अलग) से शिवलिंग का अभिषेक करें।
  5. पुनः स्नान: पंचामृत के बाद दोबारा जल से शिवलिंग को धोएं।
  6. शृंगार: अब महादेव को चंदन का त्रिपुंड लगाएं। भस्म (Vibhuti) चढ़ाएं।
  7. अर्पण:
    • बिल्व पत्र: 3 पत्तियों वाला बिना कटा-फटा बेलपत्र (Belpatra) चिकनी तरफ से चढ़ाएं। यह सबसे जरूरी है।
    • धतूरा और मदार: शिव जी को जंगली फूल और फल पसंद हैं।
    • अक्षत: बिना टूटा हुआ चावल चढ़ाएं।
  8. धूप और दीप: घी का दीपक और धूपबत्ती जलाएं।
  9. मंत्र जाप: रुद्राक्ष की माला से 108 बार महामृत्युंजय मंत्र या पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) का जाप करें।
  10. आरती: अंत में शिव जी की आरती करें और क्षमा प्रार्थना करें।

शिव पुराण में बताया गया है कि शिवलिंग पर अलग-अलग चीजें चढ़ाने से अलग-अलग इच्छाएं पूरी होती हैं। मासिक शिवरात्रि पर यह जरूर आजमाएं:

  1. विवाह के लिए: केसर मिला हुआ दूध चढ़ाएं।
  2. धन प्राप्ति के लिए: शहद (Honey) और गन्ने का रस चढ़ाएं।
  3. रोग मुक्ति के लिए: पानी में थोड़ा सा कुशा (घास) या इत्र डालकर चढ़ाएं। गाय का घी भी चढ़ाया जा सकता है।
  4. शत्रु नाश/मुकदमे में जीत के लिए: सरसों का तेल चढ़ाएं (सावधानी से)।
  5. संतान प्राप्ति के लिए: शुद्ध देशी घी से अभिषेक करें।
  6. मोक्ष और ज्ञान के लिए: केवल गंगाजल काफी है।

शिव पूजा बहुत सरल है, लेकिन कुछ गलतियां शिव जी को नाराज भी कर सकती हैं।

क्या न चढ़ाएं (Forbidden Items):

  • तुलसी: शिव जी को तुलसी दल कभी नहीं चढ़ाना चाहिए (यह भगवान विष्णु को प्रिय है)।
  • हल्दी और कुमकुम: शिवलिंग पौरुष शक्ति का प्रतीक है, इसलिए हल्दी-कुमकुम नहीं चढ़ता। यह केवल माता पार्वती (जहरी) को चढ़ता है। शिवलिंग पर केवल चंदन और भस्म लगाएं।
  • केतकी और केवड़े का फूल: यह शिव पूजा में वर्जित है।
  • शंख से जल: शिव जी ने शंखचूड़ राक्षस का वध किया था, इसलिए शिवलिंग पर शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता।

क्या करें:

  • रात्रि जागरण: मासिक शिवरात्रि की रात को सोने की बजाय भजन-कीर्तन या मंत्र जाप करें।
  • ब्रह्मचर्य: व्रत वाले दिन मन और शरीर से पवित्र रहें।
  • क्रोध न करें: घर में क्लेश करने से व्रत खंडित हो जाता है।

यदि आपने कोई मन्नत मांगी थी और वह पूरी हो गई है, या आप व्रत बंद करना चाहते हैं, तो उसका विधि-विधान से उद्यापन करें।

  • लगातार 11 या 21 मासिक शिवरात्रि व्रत करने के बाद उद्यापन करें।
  • अंतिम व्रत के अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
  • भगवान शिव और माता पार्वती का गठबंधन कराएं।
  • दान-दक्षिणा देकर व्रत पूर्ण करें।

मासिक शिवरात्रि केवल एक कर्मकांड नहीं है, यह ‘शिव’ से जुड़ने का एक मासिक अवसर (Monthly Opportunity) है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर खुद को खो देते हैं। मन अशांत हो जाता है। ऐसे में हर महीने की यह एक रात हमें फिर से केंद्र (Center) में लाती है। जब आप शिवलिंग पर जल की धारा गिराते हैं, तो सोचिए कि आप अपनी सारी चिंताओं को उस धारा के साथ बहा रहे हैं।

भोलेनाथ को सोने-चांदी के महल नहीं चाहिए, उन्हें तो बस एक लोटा जल और आपका ‘भाव’ चाहिए। इस बार की मासिक शिवरात्रि पर एक संकल्प लें और देखें कि कैसे महाकाल आपके जीवन की दिशा बदल देते हैं।

हर हर महादेव!

Leave a Comment