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केतु के उपाय किस दिन करें? मंगलवार, बुधवार या रविवार?
जब भी केतु ग्रह परेशान करता है, तो हम इंटरनेट पर या पंडित जी से उपाय तो पूछ लेते हैं—”कुत्ते को रोटी खिलाओ” या “गणेश जी की पूजा करो।”
लेकिन सबसे बड़ा कन्फ्यूजन (Confusion) यह होता है कि “ये उपाय किस दिन शुरू करें?”
कुछ लोग कहते हैं कि राहु-केतु के उपाय शनिवार को करने चाहिए, तो कुछ मंगलवार को। कुछ लोग बुधवार को गणेश जी का दिन मानते हुए उस दिन उपाय करते हैं। गलत दिन और गलत समय पर किया गया उपाय या तो असर नहीं करता, या फिर बहुत कम फल देता है।
‘द मंदिर दर्शन’ के इस लेख में हम ज्योतिष शास्त्रों का निचोड़ लेकर आए हैं। आज हम आपका यह कन्फ्यूजन हमेशा के लिए दूर कर देंगे कि केतु को खुश करने के लिए सही दिन (Best Day) कौन सा है।
सबसे महत्वपूर्ण नियम: केतु यानी “मंगल”
ज्योतिष में एक बहुत पुरानी कहावत है: “कुजवत केतु, शनिवत राहु।”
इसका मतलब है—राहु शनि की तरह व्यवहार करता है, और केतु मंगल की तरह।
इसलिए, केतु के अधिकांश उपाय, विशेषकर जो दान और शारीरिक कष्ट निवारण से जुड़े हैं, उनके लिए मंगलवार (Tuesday) का दिन सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।
लेकिन, उपाय के प्रकार के अनुसार दिन बदल भी सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं:
1. दान के लिए: मंगलवार और रविवार
अगर आप केतु के निमित्त कोई वस्तु दान कर रहे हैं (जैसे कंबल, तिल, केला, या सात अनाज), तो इसके लिए दो दिन सबसे अच्छे हैं:
- मंगलवार (Tuesday): चूंकि केतु मंगल की छाया है, इसलिए मंगलवार को किया गया दान केतु के बुरे प्रभाव (जैसे चोट लगना, सर्जरी, फोड़े-फुंसी) को तुरंत काटता है।
- रविवार (Sunday): कुछ लाल किताब के विशेषज्ञ और वैदिक ज्योतिषी मानते हैं कि केतु के दान (विशेषकर सुबह सूर्योदय से पहले) रविवार को भी किए जा सकते हैं।
निष्कर्ष: अगर आप कंफ्यूज हैं, तो मंगलवार चुनें। यह सबसे सुरक्षित और प्रभावी है।
2. पूजा-पाठ के लिए: बुधवार
केतु का कोई सिर नहीं है, वह सिर्फ धड़ है। उसे दिशा देने वाले देवता भगवान गणेश हैं। और गणेश जी का दिन बुधवार (Wednesday) है।
- अगर आप ‘गणेश अथर्वशीर्ष’ का पाठ करना चाहते हैं।
- अगर आप केतु की शांति के लिए गणेश जी को दूर्वा चढ़ाना चाहते हैं।
- अगर आप मंत्र जाप शुरू करना चाहते हैं।
तो इन सात्विक उपायों के लिए बुधवार का दिन चुनें। बुधवार को शुरू करके आप इसे रोज कर सकते हैं।
3. कुत्तों की सेवा के लिए: रविवार
केतु का वाहन कुत्ता है। कुत्तों को खाना खिलाना केतु का सबसे बड़ा उपाय है।
- वैसे तो यह काम रोज (Daily) करना चाहिए।
- लेकिन अगर शुरुआत करनी है, तो रविवार (Sunday) के दिन से शुरुआत करें। भैरव जी (जो कुत्तों के स्वामी भी हैं) का दिन रविवार माना जाता है।
प्रो-टिप: केतु के नक्षत्र
अगर आप चाहते हैं कि उपाय 100% सटीक लगे, तो दिन (Day) से ज्यादा महत्व नक्षत्र (Nakshatra) को दें।
केतु के तीन नक्षत्र होते हैं। अगर आप पंचांग देखकर इन नक्षत्रों में उपाय करें, तो दिन कोई भी हो, फल जरूर मिलेगा:
- अश्विनी (Ashwini)
- मघा (Magha)
- मूल (Moola)
जब भी चंद्रमा इन नक्षत्रों में हो, वह समय केतु के उपाय (खासकर रत्न धारण या विशेष पूजा) के लिए “गोल्डन टाइम” होता है।
सही समय क्या है?
दिन तो पता चल गया, अब समय भी जान लें:
- मंत्र जाप के लिए: केतु एक आध्यात्मिक ग्रह (Moksha Karaka) है। इसके मंत्रों का जाप सुबह ब्रह्म मुहूर्त (सूर्य निकलने से 1.5 घंटे पहले) में करना सबसे अच्छा होता है।
- दान के लिए: केतु के दान अक्सर सुबह (Morning) किए जाते हैं। राहु के उपाय शाम को होते हैं, लेकिन केतु के उपाय दिन में प्रभावी होते हैं।
- बहते पानी में बहाने के लिए: अगर कोई चीज जल प्रवाह करनी है, तो वह सूर्य ढलने से पहले कर लेनी चाहिए।
निष्कर्ष (Ketu ke upay kis din karein)
अंत में, एक बात गांठ बांध लें। दिन और वार केवल शुरुआत करने के लिए एक व्यवस्था है, लेकिन असली चमत्कार आपके ‘भाव’ और ‘निरंतरता’ (Consistency) से होता है।
केतु सिर्फ एक ग्रह नहीं, बल्कि ‘मोक्ष’ और ‘त्याग’ का प्रतीक है। वह दिन नहीं देखता, वह आपका दिल देखता है। चाहे आप मंगलवार चुनें या बुधवार, अगर आप निस्वार्थ भाव से और सच्चे मन से उपाय करेंगे, तो यह छाया ग्रह आपको कष्ट देने की बजाय जीवन में ‘स्थिरता’ और ‘ऊंचाइयां’ प्रदान करेगा।
मुहूर्त का इंतजार करके समय न गंवाएं। संकल्प लें और आज से ही शुरुआत करें।