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बृहस्पति देव की व्रत कथा और आरती

गुरुवार को लोग भगवान बृहस्पति के सम्मान में उपवास रखते हैं (खाना नहीं खाते या कम खाते हैं)। यह उपवास हमें समस्याओं से मुक्ति दिलाता है और हमारे जीवन में और भी अच्छी चीज़ें लाता है। भगवान बृहस्पति देवताओं के लिए एक बुद्धिमान शिक्षक की तरह हैं। वे हमें सीखने, सही काम करने, सच बोलने और खुश और सफल होने में मदद करते हैं। ज्योतिष में, जो कुछ लोग तारों और ग्रहों को देखने का एक तरीका मानते हैं, बृहस्पति का बहुत महत्व है क्योंकि यह हमारे जीवन और आध्यात्मिक रूप से, सौभाग्य, खुशी और विकास लाता है।
बृहस्पति देव व्रत क्यों किया जाता है?
- धन और समृद्धि की प्राप्ति के लिए
- सुखद वैवाहिक जीवन और विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए
- संतान प्राप्ति तथा शिक्षा के क्षेत्र में सफलता हेतु
- रोज़गार, प्रोमोशन और व्यापार में वृद्धि के लिए
- बृहस्पति ग्रह को मजबूत करने तथा पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए
बृहस्पति देव का पूजन कैसे करें?
प्रातःकाल की तैयारी
- सुबह स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को साफ करके पीला कपड़ा बिछाएँ।
- एक चौकी पर बृहस्पति देव की तस्वीर या पीले रंग का कपड़ा रखकर उस पर केसर, हल्दी और चावल चढ़ाएँ।
पूजन सामग्री
- पीला वस्त्र
- हल्दी, चंदन
- पीला फल (केला/चीकू)
- बेसन के लड्डू या बूंदी
- अक्षत
- दीपक
- पीला पुष्प
- गंगाजल
पूजा विधि
- दीपक जलाएँ और बृहस्पति देव का ध्यान करें।
- “ॐ ब्रिम बृहस्पतये नमः” का 108 बार जप करें।
- हल्दी, चंदन, फूल, अक्षत, प्रसाद अर्पित करें।
- अंत में व्रत कथा का श्रवण करें।
बृहस्पति देव की व्रत कथा (पूर्ण कथा)
बहुत समय पहले एक गरीब ब्राह्मण था जो अपनी पत्नी के साथ रहता था। वह बड़ा धार्मिक और दयालु था। प्रतिदिन भगवान की पूजा करता और सत्य کے मार्ग पर चलता। परंतु उसकी पत्नी अत्यंत खर्चीली और अल्पज्ञ थी। उसे धर्म-कर्म में कोई रुचि नहीं थी।
एक दिन गुरुवार के दिन ब्राह्मण बृहस्पति देव की पूजा करने लगा। पत्नी ने पूछा—
“आज क्या कर रहे हो?”
ब्राह्मण बोला— “आज बृहस्पति देव का दिन है। आज का व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।”
पत्नी बोली— “ये सब व्यर्थ है, घर में अनाज नहीं और तुम पूजा में लगे हो!”
यह कहकर वह पीले वस्त्र न पहनने और पीले रंग की चीज़ न छूने की जिद करने लगी।
उसी दिन घर में बृहस्पति देव साधु के वेश में आए। उन्होंने भोजन माँगा। पत्नी ने कहा—
“यह गुरुवार का दिन है। आज हम कुछ पीली चीज़ नहीं देंगे!”
साधु मुस्कुराए और बोले—
“माता, तुम अज्ञानवश ऐसा कह रही हो। जो बृहस्पति देव का व्रत करता है, वह कभी दरिद्र नहीं रहता।”
पत्नी ने उन्हें अपमानित किया। साधु (बृहस्पति देव) चले गए और घर की दरिद्रता और बढ़ गई। परिवार कई कठिनाइयों से गुज़रा।
एक दिन वही साधु फिर आए और ब्राह्मण की पत्नी को समझाया। इस बार पत्नी को अपने दोष का अहसास हुआ।
साधु ने कहा—
“गुरुवार का व्रत करो, पीले वस्त्र धारण करो, कथा सुनो और गरीबों को भोजन दो। बृहस्पति देव प्रसन्न होंगे।”
इस बार महिला ने पूरी श्रद्धा से व्रत रखा। धीरे-धीरे घर में सुख-समृद्धि लौट आई। धन, अनाज और खुशियाँ वापस आ गईं।
अंत में बृहस्पति देव प्रकट हुए और बोले—
“जिसने श्रद्धा से मेरा व्रत किया है, मैं उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करता हूँ।”
सभी ने देवगुरु को प्रणाम किया और इस प्रकार बृहस्पति देव का व्रत लोक में प्रसिद्ध हो गया।
बृहस्पति देव की आरती (Aarti)
आरती कूं हम बृहस्पति देव की।
प्रभु विशनुप्रिय गुरुदेव की॥
सोनै सी कांति देह सुहावै।
सूरत ऐसी मन हरषावै॥
गुरुवार का व्रत तुम मानो।
बहुत सुख संपत्ति तुम पाओ॥
प्रभु दीनन की सुनो पुकारा।
जो जन आया तुम्हारे द्वारा॥
ज्ञान बुद्धि प्रदान करो तुम।
भवसागर से पार करो तुम॥
आरती कूं हम बृहस्पति देव की।
प्रभु विशनुप्रिय गुरुदेव की॥
बृहस्पति देव व्रत के चमत्कारी लाभ

विवाह संबंधी बाधाओं का निवारण
देरी से विवाह, रिश्ते न बनना, या बाधाएँ – सब शांत होती हैं।
आर्थिक समृद्धि में वृद्धि
बिजनेस और करियर में सफलता मिलती है।
संतान प्राप्ति में सहायक
जोड़े संतान सुख चाहते हैं, उनके लिए यह व्रत बहुत प्रभावी है।
बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है
जन्म कुंडली में कमजोर बृहस्पति को बल मिलता है।
पारिवारिक शांति और सौभाग्य
घर में खुशियाँ बढ़ती हैं और दुर्भाग्य दूर होता है।
बृहस्पति देव का व्रत एक विशेष दिन है जो सीखने, सही काम करने, और सुखी एवं सफल होने का प्रतीक है। जब लोग इस दिन श्रद्धा और प्रेम के साथ व्रत रखते हैं, तो उन्हें कई अच्छी चीजें प्राप्त होती हैं और वे आनंदित महसूस करते हैं। यह व्रत सब कुछ संतुलित रखने, शांति और सुकून लाने और उनके जीवन में सौभाग्य लाने में मदद करता है।