गीता आरती pdf (Gita aarti pdf)


भगवद्गीता को केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण का ज्ञानस्वरूप माना जाता है। इसलिए गीता जी की पूजा और आरती का भी विशेष महत्व है। यह आरती गीता के ग्रंथ रूप को समर्पित है, जो हमें जीवन के हर संकट में मार्गदर्शन प्रदान करती है।

गीता आरती
जय जय श्री गीते माता, जय जय श्री गीते माता।
स्वरूप अमृत रस की घटा, पाप विनाशिनी सुखदाता॥
जय जय श्री गीते…
अठारह अध्ययन अद्भुत तेरे, सात सौ श्लोक मधुर।
श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाये, संसार को दिया उपहार॥
जय जय श्री गीते…
ज्ञान, कर्म, भक्ति का मार्ग, तीनों विस्तार बताया।
निश्चल बुद्धि का उपदेश, मोह के बंधन तुड़ाया॥
जय जय श्री गीते…
‘सर्वधर्मान्परित्यज्य’ का, अमृत वचन है तेरा।
‘मामेकं शरणं व्रज’ यह, संदेश अति न्यारा॥
जय जय श्री गीते…
कर्मण्येवाधिकारस्ते’ का, सिद्धांत जग में गाया।
फले इच्छा का त्याग कर, कर्मयोग सिखलाया॥
जय जय श्री गीते…
‘यदा यदा हि धर्मस्य’ का, वचन है भविष्यवाणी।
धर्म की रक्षा हेतु हरि, अवतार लेते प्राणी॥
जय जय श्री गीते…
गीता पाठ से दूर होते, सभी भव-जल के भंवर।
श्रद्धा से जो पढ़े तुझे, पाता वह मोक्ष अमर॥
जय जय श्री गीते…
गीता तू है ज्ञानगंगा, गीता तू है सच्चिदानन्द।
गीता तू है मोक्षदायिनी, गीता तू है परमानन्द॥
जय जय श्री गीते…
आरती गीता माता की, जो कोई भक्त गावे।
कहते हैं संतो ऋषियों, वह मुक्ति को पावे॥
जय जय श्री गीते माता, जय जय श्री गीते माता।
स्वरूप अमृत रस की घटा, पाप विनाशिनी सुखदाता॥

यह आरती विशेष रूप से गीता जयंतीमकर संक्रांतिशुक्ल एकादशी या किसी भी शुभ दिन पर की जाती है। गीता जी की आरती करने की सरल विधि इस प्रकार है:

  • आसन: सबसे पहले स्वच्छ होकर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके आसन ग्रहण करें।
  • स्थापना: एक चौकी पर लाल या पीले वस्त्र पर श्रीमद्भगवद्गीता के ग्रंथ को स्थापित करें। ग्रंथ के ऊपर या सामने एक सुंदर चित्र या प्रतिमा भी रख सकते हैं।
  • विधि: ग्रंथ पर पुष्प, अक्षत (चावल) अर्पित करें। एक थाली में घी का दीपक जलाएं। दीपक में कपूर भी डाल सकते हैं। गीता जी के सामने दीपक को घड़ी की सूई की दिशा (दक्षिणावर्त) में घुमाते हुए उपरोक्त आरती गाएं।
  • अंत: आरती के बाद दीपक को अपने ऊपर और परिवारजनों पर घुमाएं (प्रसाद रूप में)। गीता के कुछ श्लोकों का पाठ या श्रवण करें।
  • प्रसाद: मीठा प्रसाद (जैसे खीर, मिष्ठान) वितरित करें।

मान्यता: ऐसा विश्वास है कि नियमित रूप से गीता आरती करने और गीता का पाठ सुनने से घर में सद्बुद्धि, शांति और मंगल का वास होता है। यह मन के सभी संशयों और भ्रमों को दूर कर जीवन को सही दिशा प्रदान करती है।

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